Parenting Tips in Hindi – बच्चों की अच्छी परवरिश के लिये सलाह

Parenting Tips in Hindi – बच्चों की अच्छी परवरिश के लिये सलाह

-बच्चों को क्वालिटी टाइम दें

अक्सर हम काम-काज में व्यस्त रहते हैं और अपने बच्चों को समय नही दे पाते हैं और बच्चे अपनी मर्जी के हिसाब से खेल कूद में लग जाते हैं, और हम उनकी आदतों का पता सही तरह से पता नही लगा पाते इसिलिये सभी माता-पिता को चाहिये कि अपने बच्चों के साथ प्रोपर टाइम बिताये ।

-अपना गुस्सा बच्चों पर न निकालें

पति-पत्नि आपस में लड़ते झगड़ते हैं और अपना गुस्सा अक्सर अपने बच्चों पर निकालते हैं और उन्हें बेवजह हि डांट देते हैं जो कि बिल्कुल भी सही नही हैं ।

-अपनी कोई बात मनवाने के लिये किसी तरह का लालच न दें

अक्सर हम अपने बच्चों को अपनी बात मनवाने के लिये लालच दे देते हैं जैसे कि टॉफी, चॉकलेट या फिर हम उन्हें मोबाइल गेम का लालच दे देते हैं जो कि आगे चलकर उनकी लत बन जाती हैं ।

-कभी भी पब्लिक में न चिल्लाएं

जब कभी हम बच्चों को बाहर घुमाने लेकर जाते हैं तो बच्चे कुछ न कुछ गलती कर ही देते हैं और हम उन्हें उसी स्थान पर डांटने लग जाते हैं जो कि बिल्कुल भी सही नही हैं ।

-किसी बात पर जरूरत से ज्यादा रिएक्ट न करें

किसी बात पर जरुरत से ज्यादा रिएक्ट न करें अन्य्था बच्चों पर बुरा असर पड़ता हैं ।

-बच्चों के साथ टीवी देखें

बच्चों के साथ बैठकर टीवी जरूर दैंखे जिस्से कि आपको उनकी आदतों एवम उनकी रूची के बारे में पता चल सकें ।

-बच्चों से बातचीत बढ़ाएं

बच्चों से बातचीत अवश्य करें जब भीं बच्चे स्कूल से लौटकर आयें तो उनसे जरूर बातचीत करें और पुंछे की स्कूल में आज क्या सीखा ।

-अपने बच्चे को समझें

अपने बच्चे को अच्छी तरह समझे वो किसी बात पर गुस्सा करते या फिर वो चिड़चिड़े होते हैं तो बच्चों के इस बदलाव को समझे न कि बेवजह उनकों डांटे ।

-स्‍वयं को बदलें

जैसा स्वभाव आप अपने बच्चों से चाहते हो अपने आप को भी उसी तरह ढालने की कोशिश करें । अक्सर होता ये है कि हम घर पर व्यव्हार सही नही रखते और अपने बच्चों से उम्मीद रखते है कि वो केवल अच्छी आदतें हि सीखें तो ऐसा नहीं होता । बच्चे वो बातें जल्दी सीखते हैं जो वो अपनी आँखों से देखते हैं न कि जो हम सिखाते हैं ।

-बच्चों को सच्चा प्यार दें

बच्चों को हमेशा सच्चा प्यार दें जिस्से कि वो आप पर भरोसा कर सकें और अपने मन की बात खुलकर आपसे कर सकें ।

-जिद करने पर प्‍यार से समझाएं न कि डांटकर

जब भी बच्चे कोई जिद करते हैं जैसे कि किसी चीज को खरीदने के लिये जिद या फिर किसी जगह जाने के लिये कहते हैं तो हम अपने बच्चों को डांटना शुरु कर देते है जो कि बिल्कुल सही नही हैं, हमे चाहिये कि बच्चों को प्यार से समझाये न कि इस प्रकार डांटकर ।

-परवरिश में अनुशासन बहुत जरूरी है

बच्चों में अनुसासन कि आदत शुरु से हि डालें ताकि बड़े होकर वे अनुसासन हीन न बनें ।

-बच्‍चों से दोस्‍ती करें

बच्चों से दोस्ती करें जिस्से कि वे गलत आदतों से बचे रहे और ज्यादा से ज्यादा समय आपके साथ बिताये ।

अपनी इच्‍छाओं को अपने बच्‍चों पर न थोपे

अक्सर हम अपनी अधूरी इच्छाओं को अपने बच्चों पर थोप देते जैसे कि हम अपने जीवन में कुछ बनना चाहते हैं और बन नही पाते तो अपने बच्चों से उम्मीद करते है कि वो उनकी इस इच्छा को पूरी करें ।

अन्‍य बच्‍चों से तुलना न करें

हम ये नही कहते कि अपने बच्चों कि अन्य बच्चों से तुलना करना गलत है, लेकिन कभी कभार ये तुलना बच्चे को उपेक्षित कर देती है जैसे अपने किसी परिचित का बच्चा स्पोर्ट्स में अच्छा है तो आप भी ये उम्मीद करते है कि आपका बच्चा भी स्पोर्ट्स में अच्छा हो लेकिन अगर ऐसा नही है तो ये बात कतई सही नही है कि आपका बच्चा कमजोर है हो सकता है आपका बच्चा किसी ओर काम में आगे हो ।

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